Meaning of

ख़ाक

khaak • خاک

धूल; राख; महत्वहीनता

dust; ashes; insignificance

خاک; راکھ; بے وقعتی

Arabic

वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा

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कहाँ तो ख़ाक उड़ाता था मुस्कुराता था
मुझ ऐसे शख़्स को भी क्या से क्या बनाया गया

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ये बात अभी सब को समझ आई नहीं है
दीवाना है दीवाना तमन्नाई नहीं है

दिल मेरा दुखाकर ये मुझे तेरा मनाना
मरहम है फ़क़त ज़ख़्म की भरपाई नहीं है

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सदाएँ देते हुए और ख़ाक उड़ाते हुए
मैं अपने आप से गुज़रा हूँ तुझ तक आते हुए

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उम्र का एक और साल गया
वक़्त फिर हम पे ख़ाक डाल गया

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ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम
मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं

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मुझे आँखें दिखा कर बोलती है चुप रहो भैया
बहिन छोटी भले हो बात वो अम्मा सी करती है

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ख़ाक को ख़ाक से मिलने नहीं देती दुनिया
मर भी जाएँ तो कफ़न बीच में आ जाता है

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हम जानते तो इश्क़ न करते किसू के साथ
ले जाते दिल को ख़ाक में इस आरज़ू के साथ

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एक बरस और बीत गया
कब तक ख़ाक उड़ानी है

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वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा

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कहाँ तो ख़ाक उड़ाता था मुस्कुराता था
मुझ ऐसे शख़्स को भी क्या से क्या बनाया गया

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ख़ाक अपने शाब्दिक अर्थ में धूल या राख का प्रतीक है, जो कभी था उसका अवशेष है। कविता में यह मृत्यु, विनम्रता और जीवन की क्षणभंगुरता के विषयों को उजागर करता है।

कवि ख़ाक का उपयोग अस्तित्व की क्षणभंगुरता पर विचार करने के लिए करते हैं। यह जीवन के क्षणभंगुर पलों और ब्रह्मांड में हमारे स्थान को समझने के साथ आने वाली विनम्रता की याद दिलाता है।

ख़ाक हमें हमारी विनम्र शुरुआत और पृथ्वी में अनिवार्य वापसी की याद दिलाता है।