watan ki khaak zara ediyaan ragadne de | वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे

  - Unknown

वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा

  - Unknown

Paani Shayari

Our suggestion based on your choice

    हो गए राम जो तुम ग़ैर से ए जान-ए-जहाँ
    जल रही है दिल-ए-पुर-नूर की लंका देखो
    Kalb-E-Hussain Nadir
    27 Likes
    सेहरा है या पानी है
    आँखों में हैरानी है

    हम पर शक़ है लोगों को
    दिल की कारिस्तानी है
    Read Full
    Madhyam Saxena
    24 Likes
    जल चुका है जिस्म मेरा राख हूँ मैं
    पर मुझे अब भी मिली राहत नहीं है
    Shashank Shekhar Pathak
    क्या कहा दोस्त समझना है तुम्हें प्यार नहीं
    यानी बस देखना है पानी को पीना नहीं है
    Neeraj Neer
    10 Likes
    आँख वो इक शहर जिसमें दम घुटेगा
    दिल में रहना घर में रहने की तरह है
    Neeraj Neer
    23 Likes
    मेरी तक़दीर में जलना है तो जल जाऊँगा
    तेरा वादा तो नहीं हूँ जो बदल जाऊँगा
    Sahir Ludhianvi
    58 Likes
    हमीं को क़ातिल कहेगी दुनिया हमारा ही क़त्ल-ए-आम होगा
    हमीं कुएँ खोदते फिरेंगे हमीं पे पानी हराम होगा

    अगर यही ज़ेहनियत रही तो मुझे ये डर है कि इस सदी में
    न कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा
    Read Full
    Meraj Faizabadi
    39 Likes
    आँख में पानी रखो, होंटों पे चिंगारी रखो
    ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
    Rahat Indori
    48 Likes
    अगर साए से जल जाने का इतना ख़ौफ़ था तो फिर
    सहर होते ही सूरज की निगहबानी में आ जाते
    Azm Shakri
    22 Likes
    बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं
    कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं
    Irfan Siddiqi
    50 Likes

More by Unknown

As you were reading Shayari by Unknown

    नेकियों के ज़ुमरे में भी ये काम कर जाओ
    मुस्कुरा के थोड़ा सा मेरे ज़ख़्म भर जाओ

    कितने ग़म-बदामाँ हो सुब्ह से परेशाँ हो
    शाम आने वाली है अब उठो सँवर जाओ

    ज़िंदगी जो करनी है मुस्कुरा के दिन काटो
    वर्ना सब से मुँह मोड़ो ज़हर खा के मर जाओ

    गो-मगो में ज़हमत है सोचना क़यामत है
    जिस तरफ़ कहे जज़्बा बे-धड़क उधर जाओ

    सच भी अब फ़साना है हाए क्या ज़माना है
    सब को फूल दो लेकिन आप बे-समर जाओ

    वो भी सहमा सहमा है प्यार के नताएज से
    बेहतरीन मौक़ा है तुम भी इक मुकर जाओ

    मैं तो रात काटूँगा घूम-फिर के सड़कों पर
    कोई मुंतज़िर होगा तुम तो अपने घर जाओ
    Read Full
    Unknown
    किसी की तपिश में ख़ुशी है किसी की
    किसी की ख़लिश में मज़ा है किसी का
    Unknown
    53 Likes
    रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे
    उस्ताद ये क़ौमों के हैं मे'मार हमारे
    Unknown
    26 Likes
    कितने दिलों को तोड़ती है कमबख़्त फरवरी
    यूँ ही नहीं किसी ने इसके दिन घटाए हैं
    Unknown
    47 Likes
    ज़िंदगी भर की हिफ़ाज़त की क़सम खाते हुए
    भाई के हाथ पे इक बहन ने राखी बाँधी
    Unknown
    26 Likes

Similar Writers

our suggestion based on Unknown

Similar Moods

As you were reading Paani Shayari Shayari