Meaning of

माशूक़ी

maashooqi • نی

प्रेम; स्नेह; रोमांस

love; affection; romance

محبت; عشق; رومانس

Arabic

तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया
इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया

235

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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है

403

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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया
और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया

मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग
मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया

390

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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है

371

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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ
वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है

357

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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा

हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में
अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा

341

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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी

डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी

332

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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं
बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं

ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो
मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं

300

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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वगैरा करती है

बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है
रोने में आसानी पैदा करती है

285

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न करो बहस हार जाओगी
हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं

266

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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया
इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया

235

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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है

403

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माशूक़ी प्रेम की कोमल और अक्सर उथल-पुथल भरी भावनाओं को दर्शाता है। कविता में, यह प्रेमियों के बीच की लालसा और नाज़ुक नृत्य का सार पकड़ता है। यह शब्द आनंद और विषाद दोनों का भाव लिए होता है, जो रोमांटिक स्नेह की द्वैत प्रकृति को दर्शाता है।

कवि अक्सर माशूक़ी का उपयोग अप्राप्त प्रेम और रोमांटिक प्रयासों की खट्टे-मीठे स्वभाव की थीम को खोजने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो मिलन के आनंद और जुदाई के दुःख दोनों को व्यक्त कर सकता है।

माशूक़ी एक ऐसा शब्द है जो आनंद और दुःख के बीच नृत्य करता है, हृदय की गहरी इच्छाओं को पकड़ता है।