Meaning of

मातम

maatam • ماتم

शोक; विलाप; दुःख

mourning; lamentation; grief

سوگ; ماتم; غم

Arabic

उठ गई हैं सामने से कैसी कैसी सूरतें
रोइए किस के लिए किस किस का मातम कीजिए

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इस दौर-ए-सियासत का इतना सा फ़साना है
बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

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अभी रोने दो शम्ओं को मत रोको
ये परवाने का मातम कर रही हैं

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'अख़्तर' गुज़रते लम्हों की आहट पे यूँँ न चौंक
इस मातमी जुलूस में इक ज़िंदगी भी है

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जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँँ
यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता

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कोई हम से भी पूछे ये ग़म क्या है
चाहत में करते हैं वो मातम क्या है

जिगरी आते हैं कुछ ले कर मेरे घर
कहते हैं हम उन सेे ये मरहम क्या है

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जज़्बों को कभी अपने बेदार नहीं करते
क़ातिल की तरह ख़ुद को तैयार नहीं करते

छुप छुप के यूँँ करते हैं बातें जो अदावत की
हाज़िर है मेरा सीना पर वार नहीं करते

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हर रोज़ उठाता हूँ किसी ख़्वाब की मय्यत
और आप ये कहते हैं कि मातम न करूँँ मैं

इक शख़्स दिखा दो मुझे हँसता हुआ दिल से
गोया कि ये सब देख के भी ग़म न करूँँ मैं

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क्यूँ आशिक़ ही समझते हैं यहाँ सब लोग शाइ'र को?
वजह इक ही है क्या दुनिया में यूँँ मातम मनाने की?

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उठ गई हैं सामने से कैसी कैसी सूरतें
रोइए किस के लिए किस किस का मातम कीजिए

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इस दौर-ए-सियासत का इतना सा फ़साना है
बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है

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मूल रूप से 'मातम' का अर्थ शोक और विलाप की अभिव्यक्ति से है, जो अक्सर सामूहिक रूप से होता है। कविता में, यह दुःख की गहराई और हानि के साझा मानव अनुभव को दर्शाता है, जो व्यक्तिगत सीमाओं से परे है।

कवि 'मातम' का उपयोग गहन दुःख और सामूहिक शोक को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर आशा और नवीनीकरण के विषयों के विपरीत होता है, जीवन की चक्रीय प्रकृति को उजागर करता है।

'मातम' दुःख की सार्वभौमिक प्रतिध्वनि के साथ गूंजता है, हानि के बीच स्थायी मानव भावना का प्रमाण।