हर रोज़ उठाता हूँ किसी ख़्वाब की मय्यतऔर आप ये कहते हैं कि मातम न करूँ मैंइक शख़्स दिखा दो मुझे हँसता हुआ दिल सेगोया कि ये सब देख के भी ग़म न करूँ मैं— Farhat Abbas Shah