Meaning of

मयक़दा

maikdaa • مے کدہ

मदिरालय; शराबखाना

tavern; wine house

مے خانہ; شراب خانہ

Persian

चलते हैं जिन के घर याँ बोतल के ही सहारे
उन सब ग़रीब बच्चों को मय-कदा मुबारक

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ये मय-कदा है यहाँ हैं गुनाह जाम-ब-दस्त
वो मदरसा है वो मस्जिद वहाँ मिलेगा सवाब

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आज ज़ाहिद को यूँँ मय-कदा याद आया
जिस तरह काफ़िरों को ख़ुदा याद आया

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हैरत करूँँ मैं क्यूँ तेरी रविश पे
हर शय में है झलक नाज़-ओ-अदा की

उजड़े जो मय-कदा, मयकश मरेंगे
मयकश को फ़िक्र 'हैदर' मय-कदा की

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कर के क़ुर्बान अपनी ख़ुशियों को
ग़म के साए में यार जीता हूँ

मय-कदा तो नहीं मगर फिर भी
तेरी आँखों का जाम पीता हूँ

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जान-ए-जाना तुम्हारे हिज्र के बा'द
मय-कदा बन गया ठिकाना मेरा

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इश्क़ के बीमार का वाजिब मुक़द्दर मय-कदा
राह मुश्किल है न हो हर मील पर गर मय-कदा

आदमी होते ‘तहम्मुल’ रोज़ जाते काम पर
गर गली ये छोड़ देते है जहाँ पर मय-कदा

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चलते हैं जिन के घर याँ बोतल के ही सहारे
उन सब ग़रीब बच्चों को मय-कदा मुबारक

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ये मय-कदा है यहाँ हैं गुनाह जाम-ब-दस्त
वो मदरसा है वो मस्जिद वहाँ मिलेगा सवाब

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यह शब्द एक ऐसी जगह की छवि बनाता है जहाँ आत्माएँ शराब की बाहों में सांत्वना खोजती हैं। यह दुनिया के अराजकता से एक शरण है, एक ऐसा आश्रय जहाँ जीवन के बोझ को क्षण भर के लिए भुला दिया जाता है।

'मयक़दा' का उपयोग कवि अक्सर पलायन और लिप्तता के प्रतीक के रूप में करते हैं। यह एक अलग दुनिया का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ समाज के नियम निलंबित होते हैं। यह बाहरी दुनिया की गंभीरता के विपरीत है।

कविता में, 'मयक़दा' जीवन की सीमाओं से मुक्ति की अनंत खोज का रूपक है। यह पाठकों को लिप्तता और पलायन के बीच की महीन रेखा पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।