हैरत करूँँ मैं क्यूँ तेरी रविश पेहर शय में है झलक नाज़-ओ-अदा कीउजड़े जो मय-कदा, मयकश मरेंगेमयकश को फ़िक्र 'हैदर' मय-कदा की— Umrez Ali Haider