Meaning of

मर्व

marv • مرو

मर्व; प्राचीन काल का एक शहर

Marv; a city in ancient times

مرو; قدیم زمانے کا ایک شہر

Persian

जीवन के दिन चार ही फेर मरूँगा मैं
या'नी चार ही दिन और प्यार करूँँगा मैं

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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था
अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

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कच्ची 'उम्रों में हमें काम पर लगा दिया गया
हम वो बच्चे जो जवानी से अलग कर दिए गए

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ये कुछ आसान तो नहीं है कि हम
रूठते अब भी हैं मुरव्वत में!

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कुछ रिश्तों में दिल को आज़ादी नइँ होती
कुछ कमरों में रौशनदान नहीं होता है

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एक तरफ़ है पूरी दुनिया एक तरफ़ है मेरा घर
लेकिन तुम को बतला दूँ मैं दुनिया से है अच्छा घर

सब कमरों की दीवारों पर तस्वीरें हैं बस तेरी
मुझ सेे ज़ियादा तो लगता है जानेमन ये तेरा घर

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हसीन यादों के चाँद को अलविदा'अ कह कर
मैं अपने घर के अँधेरे कमरों में लौट आया

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नज़रें हो गड़ीं जिन की वसीयत पे दिनो-रात
माँ-बाप कि 'उम्रों कि दुआ ख़ाक करेंगे

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बे-मुरव्वत हो बे-वफ़ा हो तुम
अपने मतलब के आश्ना हो तुम

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जीवन के दिन चार ही फेर मरूँगा मैं
या'नी चार ही दिन और प्यार करूँँगा मैं

12

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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था
अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

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मर्व, इतिहास में डूबा एक शहर, प्राचीन सभ्यताओं और समय के प्रवाह की छवियाँ प्रस्तुत करता है। कविता में, यह मानव प्रयासों की भव्यता और अंततः पतन का प्रतीक है।

कवि अक्सर मर्व का उल्लेख करते हैं ताकि महिमा की अस्थिरता पर विचार किया जा सके। यह खोई हुई भव्यता और समय के अपरिहार्य क्षय के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है।

मर्व उत्थान और पतन के चक्रों का प्रमाण है, मानव उपलब्धियों की क्षणभंगुर प्रकृति की याद दिलाता है।