Meaning of

मूरत

moorat • مورت

मूर्ति; प्रतिमा; छवि

idol; statue; image

مورت; مجسمہ; تصویر

Sanskrit

इतनी भी  क्या जल्दी है  मेरी मूरत  बनवाने की
थोड़ा सा तो वक़्त लगेगा ख़ुद पत्थर हो जाने में

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वो सच्चाई की मूरत भी नहीं थी
उसे मेरी ज़रूरत भी नहीं थी

मैं जिस शिद्दत से उस को चाहता था
वो उतनी ख़ूब-सूरत भी नहीं थी

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एक ग़ज़ल से जिस की मूरत मैं ने आज बनाई है
एक दफ़ा जो वो पढ़ ले तो प्राण प्रतिष्ठा हो जाए

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न पूछो मुझ से तुम उस नाज़नीं का
अजंता की सी मूरत लग रही थी

वो ख़ुद भी देख कर हैराँ थी ख़ुद को
कल इतनी ख़ूब-सूरत लग रही थी

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संग-ए-मरमर की मूरत नहीं आदमी
इस क़दर ख़ूब-सूरत नहीं आदमी

चंद क़िस्सों की दरकार है बस इसे
आदमी की ज़रूरत नहीं आदमी

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मैं अपने मन के मंदिर में कोई मूरत तो रख लेता
तेरा पर्यायवाची पर कहाँ से ढूँढ़ कर लाऊँ

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कहीं इंसान ही पत्थर कहीं पत्थर की मूरत है
कभी घर से निकलते हैं तो जादू देख लेते हैं

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तनवीर चली जाती है साया नहीं जाता
इक तरफ़ा मुहब्बत को भुलाया नहीं जाता

कुछ क़हक़हों से ज़ख़्म छिपाए नहीं छिपते
हर टूटती मूरत को बनाया नहीं जाता

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संगेमरमर की तुम कोई मूरत नहीं
इतनी ज़्यादा भी तुम ख़ूब-सूरत नहीं

तुझ को मेरी ज़रूरत नहीं है अगर
मुझ को भी तेरी कोई ज़रूरत नहीं

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हुस्न तो है ही मगर वो कोई मूरत है नहीं
सिर्फ़ इक तस्वीर ही है वो सदाक़त है नहीं

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इतनी भी  क्या जल्दी है  मेरी मूरत  बनवाने की
थोड़ा सा तो वक़्त लगेगा ख़ुद पत्थर हो जाने में

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वो सच्चाई की मूरत भी नहीं थी
उसे मेरी ज़रूरत भी नहीं थी

मैं जिस शिद्दत से उस को चाहता था
वो उतनी ख़ूब-सूरत भी नहीं थी

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मूरत एक निर्मित छवि या मूर्ति को दर्शाता है, जो अक्सर आध्यात्मिक या कलात्मक महत्व से भरी होती है। कविता में, यह अपनी भौतिक रूपरेखा से परे आदर्शों, सुंदरता और दिव्यता का प्रतिनिधित्व करता है।

कवि 'मूरत' का उपयोग सुंदरता और पूर्णता की छवि को जागृत करने के लिए करते हैं। यह अक्सर अप्राप्य आदर्शों या दिव्य उपस्थिति का प्रतीक होता है।

मूरत सुंदरता का सार और दिव्यता की अनन्त खोज को पकड़ता है।