Meaning of

मुकम्मल

mukammal • مکمل

पूर्ण; संपूर्ण

complete; perfect

مکمل; کامل

Arabic

यार इक बार परिंदों को हुकूमत दे दो
ये किसी शहर को मक़्तल नहीं होने देंगे

ये जो चेहरे हैं यहाँ चाँद से चेहरे 'ताबिश'
ये मिरा इश्क़ मुकम्मल नहीं होने देंगे

37

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चाँद सा मिस्रा अकेला है मिरे काग़ज़ पर
छत पे आ जाओ मिरा शे'र मुकम्मल कर दो

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अब मिरा ध्यान कहीं और चला जाता है
अब कोई फ़िल्म मुकम्मल नहीं देखी जाती

67

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या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ
गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ

वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है
वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ

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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा
ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे

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वो पूछे तो बता देना हमारा हाल ये उस को
मुकम्मल ख़्वाब आँखों में अधूरे है बिना उस के

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आँखें देखूँ तो नज़र चेहरे से हट जाती है
ऐसी औरत है मुकम्मल नहीं देखी जाती

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वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है

वो कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तुगू
मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है

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चलता रहने दो मियाँ सिलसिला दिलदारी का
आशिक़ी दीन नहीं है कि मुकम्मल हो जाए

46

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कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता

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यार इक बार परिंदों को हुकूमत दे दो
ये किसी शहर को मक़्तल नहीं होने देंगे

ये जो चेहरे हैं यहाँ चाँद से चेहरे 'ताबिश'
ये मिरा इश्क़ मुकम्मल नहीं होने देंगे

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चाँद सा मिस्रा अकेला है मिरे काग़ज़ पर
छत पे आ जाओ मिरा शे'र मुकम्मल कर दो

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'मुकम्मल' पूर्णता या संपूर्णता की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर आदर्श, अप्राप्य, या इच्छाओं की पूर्ति का प्रतीक होता है।

कवि 'मुकम्मल' का उपयोग आदर्श प्रेम, पूर्ण क्षणों, या यात्रा की पूर्णता का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह अपूर्णता के विपरीत होता है, जो निर्दोषता की सुंदरता को उजागर करता है।

कविता में, 'मुकम्मल' वह मायावी पूर्णता है जिसे कवि पकड़ने का प्रयास करते हैं।