Meaning of

परिस्तान

paristaan • وہم

परीलोक; कल्पना की दुनिया

fairyland; realm of imagination

پریوں کی دنیا; تخیل کی دنیا

Persian

सारी हक़ बातों से पर्दा उठ गया
क्या वहम क्या ख़ुश-फ़हम, सब कुछ ख़तम

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वो हक़ीक़त को किस तरह समझे
वहम ने जिस की परवरिश की हो

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वहम मुझ को ये भाता है अभी मेरी दीवानी है
मगर मेरी दीवानी थी मियाँ पहले बहुत पहले

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तिरे होने का वहम ज़िंदा है मुझ में
मुझे लगता है दुनिया मेरी तरफ़ है

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इस लिए तुझ सेे दूर रहता हूँ
वहम में मुब्तिला नहीं होना

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न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम
रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम

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हुआ टुकड़े वहम जब ये कहा उस ने
तुम्हीं सब कुछ हो लेकिन मेरा इश्क़ नहीं

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दर्द हो तो दवा भी मुमकिन है
वहम की क्या दवा करे कोई

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झूट रौशन है कि सच्चाई नहीं जानते हैं
लोग अब वहम-ओ-गुमाँ को ही यक़ीं जानते हैं

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कभी तो आ जाए कोई एक साल मेरा
कि जिस में बेहतर हो ये मलूल हाल मेरा

कहीं मुसव्विर को भूल तो नहीं बैठा
ये जो है वहम-ए-ज़ेबाई-ओ-जमाल मेरा

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सारी हक़ बातों से पर्दा उठ गया
क्या वहम क्या ख़ुश-फ़हम, सब कुछ ख़तम

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वो हक़ीक़त को किस तरह समझे
वहम ने जिस की परवरिश की हो

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परिस्तान शब्द आश्चर्य और जादू का भाव जगाता है, एक ऐसी जगह जहाँ वास्तविकता के सामान्य नियम निलंबित हो जाते हैं। कविता में, यह अक्सर अप्राप्य या आदर्श का प्रतीक होता है, एक ऐसा क्षेत्र जहाँ सपने और इच्छाएँ आकार लेती हैं।

कवियों ने 'परिस्तान' का उपयोग एक अलौकिक दुनिया का वर्णन करने के लिए किया है, जो अक्सर वास्तविकता की कठोरता के विपरीत होती है। यह अप्राप्य सुंदरता या खुशी के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है। यह शब्द खोई हुई मासूमियत या बचपन के सपनों के लिए भी उदासी को जगाता है।

कविता के क्षेत्र में, 'परिस्तान' आदर्श और अप्राप्य का प्रतीक बना रहता है, उस सुंदरता की याद दिलाता है जो पहुँच से परे है।