Meaning of

क़ामिल

qaamil • کامل

पूर्ण; संपूर्ण; सम्पूर्ण

perfect; complete; whole

کامل; مکمل; پورا

Arabic

कहो क्या ज़ात क्या पहचान है इक मुर्शिद-ए-कामिल
बिना कण भर पढ़े मन भर क़सीदे सब को आते हैं

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चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल
हौसला किस का बढ़ाता है कोई

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उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी से अंजुम सह
में जाते हैं
कि ये टूटा हुआ तारा मह-ए-कामिल न बन जाए

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फिर उठी आख़िर सदा तौहीद की पंजाब से
हिन्द को इक मर्द-ए-कामिल ने जगाया ख़्वाब से

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नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता
कोई दुनिया में मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल नहीं मिलता

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अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर
अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे

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तेरी आँखों में कामिल डूबकर ही मर गया कोई
बताओ इस तरह से भी ख़ुदा के घर गया कोई

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कभी तो यार हम क़ाबिल बनेंगे
मिलेगा तू तभी कामिल बनेंगे

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इक पल करता मोहब्बत, फिर अगले ही पल नफ़रत तुझ सेे
रब मुझ को तू बना काफ़िर या कामिल ईमाँ दे मुझ को

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उस की हर मर्ज़ी में मैं शामिल हुआ
फिर भी मेरा इश्क़ ना-कामिल हुआ

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कहो क्या ज़ात क्या पहचान है इक मुर्शिद-ए-कामिल
बिना कण भर पढ़े मन भर क़सीदे सब को आते हैं

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चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल
हौसला किस का बढ़ाता है कोई

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'क़ामिल' शब्द पूर्णता और संपूर्णता का भाव जगाता है। अपने मूल अर्थ में, यह किसी ऐसी चीज़ को दर्शाता है जो किसी भी कमी से रहित है, एक आदर्श स्थिति का प्रतीक है। कविता में, 'क़ामिल' का प्रयोग न केवल भौतिक संपूर्णता बल्कि आध्यात्मिक और भावनात्मक पूर्णता को व्यक्त करने के लिए भी किया जाता है।

कवि अक्सर 'क़ामिल' का उपयोग एक आदर्श प्रेमी या एक संपूर्ण क्षण का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह दिव्यता को भी प्रतिबिंबित कर सकता है, एक आध्यात्मिक संपूर्णता की स्थिति का सुझाव देता है। यह शब्द 'नाक़िस' के विपरीत है, जो अपूर्णता को दर्शाता है।

कविता में, 'क़ामिल' पूर्णता की खोज की याद दिलाता है। यह हृदय की संपूर्णता की इच्छा को व्यक्त करता है।