Meaning of

क़बा

qaba • قبا

वस्त्र; परिधान; चोगा

robe; garment; cloak

قبا; لباس; چغہ

Arabic

अगर ख़ुदा बनते पत्थर को तराश के
फिर तो हर इंसान ख़ुदा का ख़ुदा होता

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उस के बदन को दी नुमूद हम ने सुखन में और फिर
उस के बदन के वास्ते इक क़बा़ भी सी गई

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किसे ख़बर वो मोहब्बत थी या रक़ाबत थी
बहुत से लोग तुझे देख कर हमारे हुए

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ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में
हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं

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मीर के बा'द ग़ालिब ओ इक़बाल
इक सदा, इक सदी में गुज़री है

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तितलियाँ ख़ून से तर यूँँ ही नहीं फिरती बशर
काँटे फूलों की क़बा ओढ़ के खिलते हैं यहाँ

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तल्ख़ बातों से ही मल्बूस न रहती है ज़बाँ
मीठे अल्फ़ाज़ ज़बानों को क़बा देते हैं

मैली पोशाक लपेटे वो मलंगों से लोग
मस्त होने पे ख़ुदा तक भी बना देते हैं

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रब्त इक़बाल से मेरा है न है मीर के साथ
हाज़िर-ए-बज़्म हूँ मैं अपनी ही तहरीर के साथ

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ढूँढ़ता फिरता हूँ मैं 'इक़बाल' अपने आप को
आप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंज़िल हूँ मैं

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हर एक शय से हसीं शय है ये मोहब्बत भी
तराश दे जो ये पत्थर को भी ख़ुदा कर दे

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अगर ख़ुदा बनते पत्थर को तराश के
फिर तो हर इंसान ख़ुदा का ख़ुदा होता

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उस के बदन को दी नुमूद हम ने सुखन में और फिर
उस के बदन के वास्ते इक क़बा़ भी सी गई

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'क़बा' मूल रूप से एक वस्त्र को संदर्भित करता है, अक्सर एक चोगा या परिधान, जो सुरक्षा और पहचान का प्रतीक है। कविता में यह आत्म के स्तरों, व्यक्तित्व के आवरणों, और अपनापन की गर्माहट का रूपक बन जाता है।

कवि 'क़बा' का उपयोग पहचान, छिपाव, और परिचित भूमिकाओं की आरामदायकता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह उन बोझों का भी संकेत दे सकता है जिन्हें हम ढोते हैं।

'क़बा' आत्म को अर्थ के स्तरों में लपेटता है, एक काव्यात्मक वस्त्र जो पहचान और आत्मनिरीक्षण से बुना गया है।