Meaning of

रस

ras • رس

रस; सार; भावना

juice; essence; sentiment

رس; جوہر; جذبات

Sanskrit

दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त
कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है

कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं
फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है

91

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

1283

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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है
ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है

ये राह-ए-इश्क़ है इस
में क़दम ऐसे ही उठते हैं
मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

221

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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी
हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी

157

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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी

140

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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं
यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं

109

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वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है
ये अगर रस्मों रिवाजों से बग़ावत है तो है

102

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कोई काँटा कोई पत्थर नहीं है
तो फिर तू सीधे रस्ते पर नहीं है

मैं इस दुनिया के अंदर रह रहा हूँ
मगर दुनिया मेरे अंदर नहीं है

97

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मैं रस्मन कह रहा हूँ ''फिर मिलेंगे''
ये मत समझो कि वा'दा कर रहा हूँ

96

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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे
हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे

ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें
प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे

95

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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त
कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है

कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं
फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है

91

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

1283

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मूल रूप में 'रस' का अर्थ है फलों या पौधों से निकाला गया सार या रस। कविता में, यह एक छंद के माध्यम से बहने वाली भावनात्मक सार या भावना को दर्शाता है, जो दिल की गहरी भावनाओं को पकड़ता है।

कवि अक्सर 'रस' का उपयोग भावनाओं की समृद्धि को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम की मिठास या दुःख की कड़वाहट को दर्शा सकता है। यह वह अदृश्य धागा है जो शब्दों को पाठक की आत्मा से जोड़ता है।

रस कविता का जीवनधारा है, जो छंदों को भावनाओं की जीवंतता से भर देता है।