Meaning of

रौनक़ें

raunaqen • رونقیں

चमक; वैभव; शोभा

splendors; glories; brightness

چمک; شان و شوکت; رونق

Arabic

कच्चे घर की रौनक़ें पीपल की छाँव छोड़कर
बस गए सब शहर में अफ़सोस गाँव छोड़कर

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शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं

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न वो क़हक़हे न वो महफ़िलें न वो मय-कदे की है रौनक़ें
हुआ क्या कि देखते-देखते ये निज़ाम सारा बदल गया

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सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई
मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई

मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई
तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई

खुशियांँ थीं उस सेे घर में थीं आंँगन में रौनकें
बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई

छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा
दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई

आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल
माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई

मेरे सुख़न पे तू ने उठाईं जो उँगलियाँ
मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई

यूँँंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी
थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई

होती नहीं है शे'र की आमद भी अब नज़र
तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई

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तेरा होना नहीं भरता जरा भी रौनकें मुझ
में
तेरा जाना भी मुझ को यार अब तन्हा नहीं करता

ये मेरी है मुहब्बत मैं अकेला कर भी सकता हूँ
तेरा मौजूद होना इस को अब दूना नहीं करता

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ज़मीं से आसमाँ तक नूर तेरा ही नज़र आया
तुझे जब चाँद ने देखा ज़मीं पर वो उतर आया

खिले हैं फूल के जैसे दर-ओ-दीवार सब घर के
ख़ुशी है रौनक़ें हैं आज मेरा यार घर आया

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जिन घरों में मुझे रौनकें दिखती थीं
घर वही दिखते क्यूँ आज वीरान हैं

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न तोड़ो फूल ये सूना लगेगा
गुलिस्ताँ की इसी से रौनक़ें हैं

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रौनकें हैं चश्म में लेकिन नमीं है
हैं यहाँ सब आप की गोया कमीं है

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रौनक़ें नहीं जातीं मेरे घर के आँगन से
दिल अगर नहीं बँटता घर बँटा नहीं होता

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कच्चे घर की रौनक़ें पीपल की छाँव छोड़कर
बस गए सब शहर में अफ़सोस गाँव छोड़कर

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शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं

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रौनक़ें चमक और जीवंत जीवन के आकर्षण का सार पकड़ता है। कविता में, यह अक्सर उत्सवों की उमंग या प्रकृति की दीप्तिमान सुंदरता का प्रतीक होता है।

कवि 'रौनक़ें' का उपयोग जीवंत सभाओं या किसी क्षण की भव्यता को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह एकांत के विपरीत हो सकता है, सामुदायिक अनुभवों की खुशी को उजागर करता है।

कविता में रौनक़ें जीवन के जीवंत क्षणों का उत्सव है, साझा भव्यता में पाई जाने वाली खुशी की याद दिलाता है।