Meaning of

सैफ़ी

safee • سیفی

तलवार से संबंधित; युद्धक

related to sword; martial

تلوار سے متعلق; جنگی

Arabic

डूब जाता हैं सफीने पे सफीना मेरे दोस्त
इतना गहरा हैं तिरी आँख का दरिया मेरे दोस्त

इक तरफ़ चलती हैं नुसरत की कवाली और हम
फूँकते जाते हैं तेरी याद में हुक्का मेरे दोस्त

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जैसे पतवार सफ़ीने के लिए होते हैं
दोस्त अहबाब तो जीने के लिए होते हैं
इश्क़ में कोई तमाशा नहीं करना होता
अश्क जैसे भी हों पीने के लिए होते हैं

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बचा लिया मुझे तूफ़ाँ की मौज ने वर्ना
किनारे वाले सफ़ीना मिरा डुबो देते

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सफ़ीने को किनारे से भँवर इक मोड़ देती है
हवा जब तेज़ चलती है इमारत तोड़ देती है

मुहब्बत सात पर्दों में जिगर महफ़ूज़ रखती है
क़ज़ा जब चिलचिलाती है तो पर्दें तोड़ देती है

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साहिल पे क़ैद लाखों सफ़ीनों के वास्ते
मेरी शिकस्ता नाव है तूफ़ाँ लिए हुए

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गिर्दाब में डूबा सफ़ीना याद आया तब ख़ुदा
ता-उम्र हम उस नाख़ुदा की बन्दगी करते रहें

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गर समा'अत हो तुझे ऐ हम-सफ़ीर
इक समुन्दर गुफ़्तगू का दिल में है

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भुलाने में किसी को भी पसीने छूट जाते हैं
सफ़र के साथ चलने में कबीले छूट जाते हैं

अगर क़िस्मत हो अच्छी तब समुंदर साथ चलता है
बुरा हो वक़्त तो साहब सफ़ीने छूट जाते हैं

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सफ़ीने को सुख़न के डूब जाने से बचा मौला
के नाशायर यहाँ पर अब ग़ज़ल के शे'र कहते हैं

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हुआ दिल किसी पे फ़िदा रफ़्ता- रफ़्ता
चला प्यार का सिलसिला रफ़्ता- रफ़्ता

मुहब्बत की बातें तुम्हें क्या बताएँ
मुहब्बत से सब कुछ मिला रफ़्ता- रफ़्ता

ख़ुशी आज मुझ को मिली है जहाँ की
ग़मों का अँधेरा मिटा रफ़्ता- रफ़्ता

यक़ीनन इधर आएगी आज ख़ुशबू
चली फिर से बादे सबा रफ्ता- रफ्ता

रची जिस ने साज़िश गिराने की मुझ को
वही मुझ को गिरता दिखा रफ़्ता- रफ़्ता

बुज़ुर्गों की सेवा करें जो जतन से
मिले उन की जग में दुआ रफ़्ता- रफ़्ता

कठिन राह पर हौसला साथ हो तो
मिले मंज़िलों का पता रफ़्ता- रफ़्ता

"कमल" मुझ को तूफ़ाँ डरा पाएँगे क्या
सफ़र पर सफ़ीना चला रफ़्ता- रफ़्ता

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डूब जाता हैं सफीने पे सफीना मेरे दोस्त
इतना गहरा हैं तिरी आँख का दरिया मेरे दोस्त

इक तरफ़ चलती हैं नुसरत की कवाली और हम
फूँकते जाते हैं तेरी याद में हुक्का मेरे दोस्त

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जैसे पतवार सफ़ीने के लिए होते हैं
दोस्त अहबाब तो जीने के लिए होते हैं
इश्क़ में कोई तमाशा नहीं करना होता
अश्क जैसे भी हों पीने के लिए होते हैं

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'सैफ़ी' शब्द तलवार की धार और उसकी सटीकता को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर शक्ति, वीरता और सत्य की धार का प्रतीक होता है। हवा में तलवार के चलने की छवि शक्तिशाली और सुंदर दोनों है, जो विनाश और सौंदर्य की द्वैतता को पकड़ती है।

'सैफ़ी' का उपयोग कवि बहादुरी और संघर्ष के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर कोमलता या असुरक्षा के विपरीत रखा जाता है। यह शब्द योद्धा के सम्मान या न्याय की निरंतर खोज का भी संकेत दे सकता है।

'सैफ़ी' तलवार की सुंदरता और उग्रता को समेटे हुए है। यह साहस और सत्य की खोज के दिल की बात करता है।