
डूब जाता हैं सफीने पे सफीना मेरे दोस्त
इतना गहरा हैं तिरी आँख का दरिया मेरे दोस्त
इक तरफ़ चलती हैं नुसरत की कवाली और हम
फूँकते जाते हैं तेरी याद में हुक्का मेरे दोस्त
— Moin Hasan
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