Moin Hasan

Moin Hasan

@moinha93931

Moin Hasan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Moin Hasan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

तितलियों से बाग रोशन होता हैं
बेटियों से घर में बरकत होती हैं

Moin Hasan

कुछ ने मुझे दिलासा दिया कुछ ने आपको
हम लोग तेरे बाद दो-हिस्सो में बट गए

हाथो में हाथ दे के कहा था की साथ हैं
इक मौज आई लोग किनारे से हट गए

क्या ही बताऊ यार तिरे बाद क्या हुआ
सारे दरख्त बह गए सब दरिया कट गए

Moin Hasan

कभी सहरा कभी दरिया हुआ हूँ
मैं अपने आप से हारा हुआ हूँ

बड़ी मुश्किल से भूला हूँ किसी को
बड़ी मुश्किल से तुम्हारा हुआ हूँ

Moin Hasan

किसी किसी के तो शेरों में बात होती हैं
किसी किसी का तख़ल्लुस से काम चलता हैं

Moin Hasan

किसी के ऐब बताना कोई कमाल नहीं
किसी के ऐब छिपाना कलाम होता हैं

Moin Hasan

मैं तकता हूँ साहिल से गहरे दरिया को
और आँखों की गहराई बढ़ती जाती हैं

Moin Hasan

डूब जाता हैं सफीने पे सफीना मेरे दोस्त
इतना गहरा हैं तिरी आंख का दरिया मेरे दोस्त

इक तरफ चलती हैं नुसरत की कवाली और हम
फूँकते जाते हैं तेरी याद में हुक्का मेरे दोस्त

Moin Hasan

ख़्वाब सारे रफ्ता-रफ्ता दिल में दफ़्न हो गए
तू गया तो ख़्वाहिशों ने भी कलाई काट दी

Moin Hasan

देख कर नक़्श ए पा मैं चलता हूँ
ये जो रस्ता हैं उनका रस्ता हैं

Moin Hasan

मैं रक़्स क्यो न करू यार अपनी किस्मत पर
के भीख मिलती हैं जिससे वो दर तुम्हारा हैं

Moin Hasan

बात कहनी हैं उसे दिल की मगर डरता हूँ
मेरा इज़हार रिफ़ाक़त भी मिटा सकता हैं

Moin Hasan

उसकी मजबूरियां समझता हूँ
फिर भी कैसे जुदा करू उसको

Moin Hasan

उसके हाथों से गिरे चाँद सितारे ऐसे
जैसे मसनद से कोई खाक़ नशी होता हैं

तेरी बाहों से निकलने का खयाल आए क्यो
उम्र की कैद से कब कैदी बरी होता हैं

Moin Hasan

दरिया गहरा हैं मगर पार किया जाएगा
बीच से राह को हमवार किया जाएगा

मैं परिंदों की मुहब्बत में मरूँगा इक दिन
मुझको मिन-जुम्ला-ए-अशजार किया जाएगा

Moin Hasan

इतना जल्दी न रखो यार बदन तय कर के
हमने देखा भी नहीं तुमको अभी जी भर के

इक तो वो मोम बदन और लताफ़त से चूर
हाथ भी उसको लगाया था मैंने डर डर के

Moin Hasan

पहले पहले तो थी रोने की सहूलत क्या क्या
आँख भरती वो तो सीने से लगा लेता था

Moin Hasan

मैं तुझको भूल के ज़िन्दा रहा करामत हैं
सुई के छेद से हाथी गुज़र गया इक दिन

Moin Hasan

लब पे बोसा न सही गाल ही आगे करते
डूबते को किसी तिनके का सहारा होता

Moin Hasan

वो एक शख्स जो सो बार बे-वफ़ा निकला
वो चाहता हैं के हम अब भी उससे प्यार करे

Moin Hasan