Meaning of

सुख़नवर

sukhnavar • سخنور

कवि; शायर

poet; bard

شاعر; ناظم

Persian

हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ पे मरना तो लाज़मी है
मगर क़सम से सुख़न-वरों के कलाम ज़िन्दा रहा करेंगे

लगा के रक्खे अभी से पौधे ये छाँव देंगे मुसाफ़िरों को
उन्हीं दरख़्तों पे फिर परिंदे बसा के दुनिया उड़ा करेंगे

0

Download Image

उस एक ख़त ने सुख़न-वर बना दिया मुझ को
वो एक ख़त कि जो लिक्खा नहीं गया मुझ से

29

Download Image

तुम सेे बिछड़ के आई हमें ये सुख़नवरी
हम को तुम्हारी याद ने शाइ'र बना दिया

पंछी मुझे कहीं तू अकेला न छोड़ दे
इस डर से मैं ने यार तुझे ख़ुद उड़ा दिया

2

Download Image

ता-क़यामत अमर नहीं होता
मैं सुख़नवर अगर नहीं होता

1

Download Image

मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया
जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे

कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास
लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे

1

Download Image

आए सुख़नवरी में वो सुख की तलाश में
अब कह रहे हैं हर घड़ी दुख बढ़ रहा है दोस्त

0

Download Image

ब-सद-ख़ुलूस ब-सद-एहतिराम करते रहो
ख़ुलूस-ए-क़ल्ब से ज़िक्र-ए-इमाम करते रहो

गर इख़्तिलाफ़ को आलम से दूर करना हैं
तो इत्तिहाद का पैग़ाम आम करते रहो

0

Download Image

हम याद में ग़ालिब के सुख़नवर हो चले हैं
ग़ालिब भी हमें देख के इतराता तो होगा

0

Download Image

हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ पे मरना तो लाज़मी है
मगर क़सम से सुख़न-वरों के कलाम ज़िन्दा रहा करेंगे

लगा के रक्खे अभी से पौधे ये छाँव देंगे मुसाफ़िरों को
उन्हीं दरख़्तों पे फिर परिंदे बसा के दुनिया उड़ा करेंगे

0

Download Image

उस एक ख़त ने सुख़न-वर बना दिया मुझ को
वो एक ख़त कि जो लिक्खा नहीं गया मुझ से

29

Download Image

‘सुख़नवर’ शब्द उस व्यक्ति को दर्शाता है जो शब्दों को कविता में ढालता है, भावनाओं और अंतर्दृष्टि के साथ गूंजने वाले छंदों का सृजन करता है। मूल रूप से, यह एक कवि को संदर्भित करता है, लेकिन काव्यात्मक क्षेत्र में, यह उन लोगों की आत्मा को समाहित करता है जो भाषा को कला में बुनते हैं, अवर्णनीय और गहन को पकड़ते हुए।

कवि ‘सुख़नवर’ का उपयोग स्वयं कविता की कला का जश्न मनाने के लिए करते हैं, उन लोगों का सम्मान करते हैं जो मौन को आवाज़ देते हैं और अमूर्त को आकार देते हैं। यह शब्दों को अर्थ में बुनने की कालातीत कला को श्रद्धांजलि है।

एक ‘सुख़नवर’ के हाथों में, शब्द भावनाओं के वाहक बन जाते हैं, मानव अनुभव के भार को समय के पार ले जाते हुए।