Meaning of

याद-ए-हक़

yaad-e-haq • یاد حق

सत्य की स्मृति; दिव्य की याद

remembrance of truth; memory of the divine

حق کی یاد; الٰہی کی یاد

Arabic

तरकीब ढूँढ़ता हूँ उन्हें भूल जाने की
और इस अमल में याद वो फिर और आते हैं

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जो भी हम को भुला अब चुके हैं
याद वो ख़ूब हम को करेंगे

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मुद्दत सी हो गई न किए याद वो हमें
हिम्मत नहीं मेरी कि करूँँ प्यार अब उन्हें

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नहीं है प्यार अब हम को फ़लाने से
न पड़ता फ़र्क़ उस के यार जाने से

रही है याद वो हम को हमेशा ही
नहीं भूले उसे हम तो भुलाने से

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ख़ुदा करे न करे याद वो कभी मुझ को
ख़ुदा करे मैं उसे याद उम्र भर आऊंँ

कहो जो तुम के निकाह कर रही हूँ मैं उस सेे
ख़ुदा करे मैं ये सुनने से पहले मर जाऊँँ

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आज भी है याद वो नंबर पुराना यार का
बात वो है और उस
में फ़ोन अब लगता नहीं

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मुझे ही याद वो क्यूँँ बार बार आती है
वो नींद चैन को भी मेरे मार जाती है

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आती है मुझ को अब जब कभी याद वो
रात मेरी अँधेरों में खो जाती है

फिर सुलाने में ख़ुद मुझ को थक हार के
नींद मेरे सिरहाने पे सो जाती है

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याद वो लौटा गए लेकिन मिरा
एक दिल भी था वहाँ खोया हुआ

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यार अब हिचकियाँ नहीं आती
याद वो अब मुझे नहीं करता

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तरकीब ढूँढ़ता हूँ उन्हें भूल जाने की
और इस अमल में याद वो फिर और आते हैं

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जो भी हम को भुला अब चुके हैं
याद वो ख़ूब हम को करेंगे

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'याद-ए-हक़' वाक्यांश एक आध्यात्मिक लालसा को समेटे हुए है, परम सत्य या दिव्य उपस्थिति की गहरी स्मृति। यह अनंत से जुड़ाव का सुझाव देता है, उस शुद्धता और स्पष्टता की लालसा जो सत्य लाता है।

कवि अक्सर 'याद-ए-हक़' का आह्वान करते हैं ताकि आध्यात्मिक जागृति और सत्य की खोज के विषयों का अन्वेषण किया जा सके। इसका उपयोग आत्मा की प्रबोधन और दिव्यता की ओर यात्रा को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

कविता में, 'याद-ए-हक़' एक प्रकाशस्तंभ बन जाता है, संदेह की छायाओं के माध्यम से सत्य के प्रकाश की ओर साधक का मार्गदर्शन करता है।