Meaning of

ज़बीं

zabeen • زبین

माथा; ललाट

forehead; brow

پیشانی; ماتھا

Persian

कोई तो हो जो जबीं चूम कर ये हम सेे कहे
चाय का कप ये रखा है चलो अब उठ जाओ

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फिर एक रोज़ मुक़द्दर से हार मानी गई
ज़बीन चूम के बोला गया "ख़ुदा हाफ़िज़"

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दो आँखें हैं दो पलकें हैं जबीं है चूमने ख़ातिर
बहुत से ज़ाविए हैं उस बदन में देखने लाइक़

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ब-जुज़ ख़ुदा के किसी का हम पे करम नहीं है ये कम नहीं है
किसी का सजदा जबीं पे अपनी रक़म नहीं है ये कम नहीं है

हमारी चुप्पी ये है ग़नीमत वगरना ये जो किया है तुम ने
यक़ीन मानो हमारा माथा गरम नहीं है ये कम नहीं है

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जिस दिन मिरी जबीं किसी दहलीज़ पर झुके
उस दिन ख़ुदा शिगाफ़ मिरे सर में डाल दे

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बादलों में से छनता हुआ नूर देख
ऐसी रौशन जबीं है मेरे यार की

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ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े
बस दूर ही से देख लिया और चल पड़े

दिल में फिर इक कसक सी उठी मुद्दतों के बा'द
इक उम्र के रुके हुए आँसू निकल पड़े

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चुराया है किसी ने मह-जबीं मुझ सेे
'इशा ने रौशनी को हर लिया जैसे

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जब कभी ख़्वाब आँख में आए
यूँँ लगा मह-जबीं वही आया

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हम वो लड़के कि जबीं भी चू
मेंगे और
तेरे पाँव की पायल भी बांँधेंगे हम

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कोई तो हो जो जबीं चूम कर ये हम सेे कहे
चाय का कप ये रखा है चलो अब उठ जाओ

6

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फिर एक रोज़ मुक़द्दर से हार मानी गई
ज़बीन चूम के बोला गया "ख़ुदा हाफ़िज़"

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ज़बीं, माथा, अक्सर भावनाओं का कैनवास माना जाता है। यह आंतरिक विचारों और भावनाओं को दर्शाता है, मन की स्थिति का एक मूक संचारक।

कवि ज़बीं का उपयोग गरिमा और गर्व का प्रतीक बनाने के लिए करते हैं, या दुःख और विचार की गहराई को दर्शाने के लिए। यह चेहरे पर उकेरी गई मूक कहानियों का रूपक है।

ज़बीं हमें उन मूक कथाओं पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है जो हम अपने भीतर रखते हैं। यह हमारी आत्माओं पर लिखी कहानियों की कोमल याद दिलाता है।