Meaning of

ज़ेब

zeb • زیب

श्रृंगार; अलंकरण; सुंदरता

adornment; embellishment; beauty

زیور; آرائش; خوبصورتی

Persian

पाज़ेब की आवाज़ ही अब गूॅंजती है कान में
होगी जहाँ भी तू कहीं लेकिन रहेगी ध्यान में

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वो मेरी फिक्र तो करता है मगर प्यार नहीं
या'नी पाज़ेब में घुँघरू तो है झंकार नहीं

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रक़्स करना है तो फिर होश की पाज़ेब उतार
आलम-ए-वज्द में ही बे-ख़बरी आती है

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क्या वाक़ई वो तेरी पाज़ेब की खनक थी
ऐसा सुकून तो बस नुसरत के गाने में है

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कभी तो आ जाए कोई एक साल मेरा
कि जिस में बेहतर हो ये मलूल हाल मेरा

कहीं मुसव्विर को भूल तो नहीं बैठा
ये जो है वहम-ए-ज़ेबाई-ओ-जमाल मेरा

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बड़ी अज़ीब तमन्ना है मेरे दिल की दोस्त
मुझे हर एक नज़र में ख़राब होना है

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सारे सुर उस की ख़ुशामद में लगे हैं देखिए तो
आज उस ने पैरों में पाज़ेब जो पहनी हुई है

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दर-ब-दर किसी जानिब रोज़ चल रहा हूँ मैं
इक अज़ीब सूरत में ख़ुद ही ढल रहा हूँ मैं

कौन जल गया अंदर कौन मर गया मुझ
में
किस की मौत पर तन्हा रोज़ जल रहा हूँ मैं

इतना कहने पर भी जब बदली ही नहीं दुनिया
बे-वजह ही ख़ुद को फिर क्यूँ बदल रहा हूँ मैं

ख़ाक हो चुका है दिल चल रही मिरी साँसें
रफ़्ता रफ़्ता ही ख़ुद के दिन निगल रहा हूँ मैं

ज़िंदगी भला अब ये किस तरह बसर होगी
आज कल ग़मों से भी कब बहल रहा हूँ मैं

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दर्द छुपाओ और मिसाल बनो
इक काम करो तुम शराब बनो

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मैं ग़ज़ल का बदन सँवारता हूँ
जब तुम्हें पन्नों पर उतारता हूँ

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पाज़ेब की आवाज़ ही अब गूॅंजती है कान में
होगी जहाँ भी तू कहीं लेकिन रहेगी ध्यान में

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वो मेरी फिक्र तो करता है मगर प्यार नहीं
या'नी पाज़ेब में घुँघरू तो है झंकार नहीं

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‘ज़ेब’ शब्द सौंदर्य और श्रृंगार की अवधारणा को दर्शाता है, जो अक्सर उस शालीनता से जुड़ा होता है जो किसी की उपस्थिति को बढ़ाता है। कविता में, यह उस कृपा और आकर्षण का प्रतीक है जो साधारण को उत्कृष्ट बनाता है, सौंदर्य के आकर्षण का सार पकड़ता है।

कवि अक्सर 'ज़ेब' का उपयोग प्रकृति या प्रिय की सुंदरता का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो एक क्षण की शालीनता, एक इशारे की कृपा, या एक दृश्य के आकर्षण को जीवंत करता है। यह कच्चे और बिना सजावट के विपरीत है, सुंदरता की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर करता है।

कविता की बुनावट में, 'ज़ेब' वह सुंदरता की धागा है जो अस्तित्व के कपड़े में बुनता है, हर तह में शालीनता जोड़ता है।