Meaning of

ज़ेब-ए-तन

zeb-e-tan • زیب تن

शरीर का श्रृंगार; वस्त्र का अलंकरण

adornment of the body; embellishment of attire

جسم کی زیبائش; لباس کی آرائش

Persian

देखा जो चाँद माह-ए-मुहर्रम का अर्श पर
आँखों ने ज़ेब-ए-तन किया अश्कों का पैरहन

धड़कन से दिल की आई सदा या हुसैन की
नौहा-कुनाँ है नौहा-सरा है हर अंजुमन

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लिबास-ए-सुर्ख़ करो ज़ेब-ए-तन मता-ए-जाँ
लिबास-ए-सुर्ख़ में तुम इक गुलाब लगती हो

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लो चाँद हो गया नमू माह-ए-ख़राम का
ऐ मोमिनों लिबास-ए-सियाह ज़ेब-ए-तन करो

फ़र्श-ए-अज़ा बिछा के अज़ाख़ाने में शजर
अब सुब्ह-ओ-शाम ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन करो

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देखा जो चाँद माह-ए-मुहर्रम का अर्श पर
आँखों ने ज़ेब-ए-तन किया अश्कों का पैरहन

धड़कन से दिल की आई सदा या हुसैन की
नौहा-कुनाँ है नौहा-सरा है हर अंजुमन

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लिबास-ए-सुर्ख़ करो ज़ेब-ए-तन मता-ए-जाँ
लिबास-ए-सुर्ख़ में तुम इक गुलाब लगती हो

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यह वाक्यांश स्वयं को सजाने की क्रिया का सुझाव देता है, सुंदरता और गरिमा के साथ अपनी उपस्थिति को बढ़ाना। कविता में, यह अक्सर आंतरिक सुंदरता और गरिमा की बाहरी अभिव्यक्ति का प्रतीक है, जहां वस्त्र किसी की आत्मा का प्रतिबिंब बन जाता है।

कवि इसका उपयोग पहचान और आत्म-अभिव्यक्ति के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह उपस्थिति और सार के बीच के संबंध को उजागर करता है। यह वाक्यांश सुंदरता को मौन संचार के एक रूप के रूप में व्यक्त कर सकता है।

श्रृंगार एक दर्पण बन जाता है, आत्मा की मौन सुंदरता और अव्यक्त गरिमा को प्रतिबिंबित करता है।