Meaning of

ज़ीनत

zeenat • ظفر

सौंदर्य; अलंकरण

beauty; adornment

خوبصورتی; زینت

Arabic

खा गई ग़म की ख़िज़ाँ उन को मुज़फ़्फ़रपूर में
इश़्क के पौधे कभी जो थे उगाये मैं ने

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मुझे मालूम है दुनिया मुझे कब तक पुकारेगी
किराए के मकानों में कभी ज़ीनत नहीं मिलती

तो फिर जन्नत हक़ीक़त में नहीं है मान ले ज़ाहिद
हमारे साथ रह कर भी अगर जन्नत नहीं मिलती

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है दसहरे में भी यूँँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर'
पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है

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ख़ला की ज़ीनतें महफ़िल ख़ला की शान है सूरज
सितारे रक़्स करते हैं तेरे आगे तेरे पीछे

क़मर के नूर से ऊपर तू ही अफ़ज़ल तू ही पारस
वो सारे रंग फ़ीके हैं तेरे आगे तेरे पीछे

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लड़ाकर हरे को वो भगवे से देखो
जफर अब कबूतर उड़ाने लगा है

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वो पौदा इश्क़ का अब गिन रहा है आख़री साँसें
मुज़फ़्फ़रपुर में पनगाया था अश्क-ए-खूँ से मैं जिस को

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ऐ रज़ा कुछ लड़कियाँ जो घर की ज़ीनत थीं कभी
रौनक़-ए-बाज़ार होती जा रही हैं आज कल

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तुझ से मिलने की तमन्ना तो नहीं लेकिन करूँँ क्या
घर के रस्ते में मुज़फ़्फ़रपुर भी आ जाता है यारों

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कर चुके हम बिहार से तौबा
भाड़ में जाए अब मुज़फ़्फ़रपुर

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ये तेरे होंटों की ज़ीनत कैसी है
फूलों के नाजुक़ गालों के जैसी है

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खा गई ग़म की ख़िज़ाँ उन को मुज़फ़्फ़रपूर में
इश़्क के पौधे कभी जो थे उगाये मैं ने

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मुझे मालूम है दुनिया मुझे कब तक पुकारेगी
किराए के मकानों में कभी ज़ीनत नहीं मिलती

तो फिर जन्नत हक़ीक़त में नहीं है मान ले ज़ाहिद
हमारे साथ रह कर भी अगर जन्नत नहीं मिलती

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'ज़ीनत' का मूल अर्थ सौंदर्य या अलंकरण है, जो अक्सर शारीरिक रूप या सजावट से जुड़ा होता है। कविता में, यह शब्द भौतिक से परे जाकर आत्मा की आंतरिक सुंदरता और गरिमा को दर्शाता है, जो एक गहरी, अधिक आध्यात्मिक सुंदरता को प्रतिबिंबित करता है।

'ज़ीनत' का प्रयोग कवि अक्सर उस प्रिय की छवि को उभारने के लिए करते हैं जिसकी सुंदरता बाहरी और आंतरिक दोनों होती है। यह प्रकृति की सुंदरता या किसी क्षण की गरिमा का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द सादगी या कठोरता के विपरीत, समृद्धि और गहराई की दृष्टि प्रस्तुत करता है।

'ज़ीनत' सुंदरता की द्वैतता को समेटे हुए है, जो देखी और महसूस की जाती है। यह हमें इस पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है कि वास्तव में हमारे जीवन को क्या सजाता है।