Meaning of

ज़ेर

zer • زیر

नीचे; अधीन; तले

below; under; beneath

نیچے; تحت; زیر

Arabic

न जाने कब से सहरा था मेरे दिल का जज़ीरा
तेरे बस एक गुल ने कर दिया गुलज़ार इस को

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दूर अगर रहते हैं माँ से हम ख़र्चीले हो जाते हैं
ऐसा खाना मिलता है सब कपड़े ढीले हो जाते हैं

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भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'

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मुझ को न समझ आता है कुछ
मैं पेश कहूँ या ज़ेर कहूँ

क्यूँ शहर मेरा तू ने छोड़ा
अब किस को देख के शे'र कहूँ

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ज़ेर-ए-साया-ए–ज़ुल्फ, सोचा नहीं
तेरी फुर्कत भी सहनी पड़ेगी हमें

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खेल शतरंज के बदलते हैं
दाव असली वज़ीर चलते हैं

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हाट इक रोज़ मेरे गाँव का आ कर देखो
यहाँ फ्रीज़र नहीं मिट्टी के घड़े मिलते हैं

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अलिफ़ को बै ज़बर को ज़ेर कहता है
हर इक टटपुंजिया अब शे'र कहता है

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ऐ ग़में हिज्रां यूँँ रह रह के जलाओ न मुझे
वक़्त गुजरा तू भी आ आ के सताओ न मुझे

चैन से जीने दे मुझ को ओ मेरे ख़्वाब-ओ-ख़्याल
मिट चुकी कब की सुनो ऐसे मिटाओ न मुझे

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ज़बर के बा'द मैं ये ज़ेर कहता हूँ
तुम्हारी याद में जाँ शे'र कहता हूँ

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न जाने कब से सहरा था मेरे दिल का जज़ीरा
तेरे बस एक गुल ने कर दिया गुलज़ार इस को

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दूर अगर रहते हैं माँ से हम ख़र्चीले हो जाते हैं
ऐसा खाना मिलता है सब कपड़े ढीले हो जाते हैं

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ज़ेर नीचे या अधीन होने का भाव देता है, अक्सर किसी छिपे या अंतर्निहित चीज़ का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता है। कविता में, यह सतह के नीचे की परतों, भावनाओं या विचारों की अदृश्य गहराई को उभार सकता है।

कवि ज़ेर का उपयोग अर्थ की छिपी परतों को खोजने के लिए करते हैं। यह अनकही भावनाओं की गहराई या उन आधारों का सुझाव दे सकता है जिन पर दृश्य संरचनाएँ खड़ी होती हैं। ज़ेर उस पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है जो नीचे छिपा है।

ज़ेर अदृश्य और अनकही चीज़ों को प्रकट करता है। यह हमें सतह से परे देखने के लिए याद दिलाता है, उन गहराइयों में जहाँ सच्ची समझ निहित है।