चाँदनी रात में तारों पे ग़ज़ल कहना हैआज फिर चाँद की आँखों पे ग़ज़ल कहना हैइतना आसाँ नहीं उस के लिए कुछ भी कहनायूँ समझ लीजिए ख़्वाबों पे ग़ज़ल कहना है— Harsh saxena