ख़्वाहिशों का गला दबा लेते
फिर मेरी तरह मुस्कुरा लेते
दोस्ती प्यार में बदल जाती
थोड़ी हिम्मत अगर जुटा लेते
कैसा है स्वाद बे-वफ़ाई का
गर चखे होते तो बता लेते
ना-ख़ुदा ये तुम्हारे हाथ में था
डूबती कश्ती को बचा लेते
रात यूँ आँख में सुलगती न तो
एक कश नींद का लगा लेते
सर्द मौसम पुराने गाने चाय
दोस्त सिगरेट भी इक जला लेते
मन का रुक जाता गर महाभारत
हम भी फिर बाँसुरी बजा लेते
— Dhirendra Pratap Singh















