कितना फिर इतराता है वो
पास तेरे रहता है जो
आप जिस को अपना कह दें
पर बिना उड़ जाता है वो
जिस को भी तुम हँस के देखो
फिर वहीं मर जाता है वो
जो तेरे हाथों से खाले
और कुछ कब खाता है वो
— Jagat Singh
पास तेरे रहता है जो
आप जिस को अपना कह दें
पर बिना उड़ जाता है वो
जिस को भी तुम हँस के देखो
फिर वहीं मर जाता है वो
जो तेरे हाथों से खाले
और कुछ कब खाता है वो
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling