बहुत हसीन वो गुज़रा हुआ ज़माना था
किसे ख़बर थी उसे फिर कभी न आना था
ज़मीं से चाँद सितारे हसीन लगते थे
बहुत क़रीब से देखा तो यह फ़साना था
पुरानी याद की चादर उधर से उड़ आई
बदन को सर्द हवाओं से जो बचाना था
समेटने में बहुत देर कर दिया हम ने
कहीं पे दिल तो कहीं जिस्म का ठिकाना था
हवा को जलते चराग़ों से कुछ नहीं मतलब
इसे तो बुझते चराग़ों को ही बुझाना था
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