ज़िंदगी पर किताब लिक्खे हैं
उस
में सारे हिसाब लिक्खे हैं
जिस
में लिक्खा कि इश्क़ काँटा है
उस
में तुझ को गुलाब लिक्खे हैं
इश्क़ में बस ग़मों के साए हैं
बात ये बे-हिसाब लिक्खे हैं
सारे ग़म ही मेरी हक़ीक़त हैं
और तुझ को ही ख़्वाब लिक्खे हैं
— Jitendra "jeet"















