jang men porus se ladte khaas manzar ho gaya | जंग में पोरस से लड़ते ख़ास मंज़र हो गया

  - Manohar Shimpi

जंग में पोरस से लड़ते ख़ास मंज़र हो गया
फ़त्ह करनी थी जिसे दुनिया सिकंदर हो गया

एक तोहफ़ा ख़ूब बाजीराव ने ही दे दिया
जंग हो या 'इश्क़ फिर मशहूर ख़ंजर हो गया

एक पल में चाल टेड़ी फिर वो कैसे चल गया
खेलता जो है इशारों पर वो बंदर हो गया

मस'अला कोई कचहरी में सुलझ ही तो गया
मामला था ही पुराना फिर वो अंदर हो गया

जंग में हैवानियत भी तो बरसती आग है
खेत के अब साथ सारा शहर बंजर हो गया

  - Manohar Shimpi

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