जब उस से मिलो यार तो यारा उसे कहना
मुश्किल है बिना उस के गुज़ारा उसे कहना
कहना कि सभी शर्म के परदे वो उठा दे
बाहों का हमें दे दे सहारा उसे कहना
गर वाक़ई वो जान के दर पे है हमारी
कर दे वो फ़क़त एक इशारा उसे कहना
हम दौड़े चले आऍंगे आवाज़ पे उस की
गर उस ने कभी हम को पुकारा उसे कहना
रह रह के सभी याद वो आते हैं हमें दिन
कि जान कभी जान से प्यारा उसे कहना
हैं कोशिशें बे-सूद सभी क़त्ल की मेरे
मरता है कभी कोई दोबारा उसे कहना
फट जाएगा ऐसे तो हमारा जिगर अशरफ़
यक-दम न करे हम से किनारा उसे कहना
— Meem Maroof Ashraf















