न ख़ुद को यूँँ सताना चाहिए था
उसे दिल से मिटाना चाहिए था
नहीं वो मेरे क़ाबिल कह गया वो
उसे कुछ तो बहाना चाहिए था
मैं क्या देता मोहब्बत के अलावा
मगर उस को ख़ज़ाना चाहिए था
उसे भी था मुझे बर्बाद करना
मुझे भी इक फ़साना चाहिए था
जफ़ा-कारी पे भी वो कितना ख़ुश है
उसे तो डूब जाना चाहिए था
वही सब बे-ख़ुदी में कह गया हूँ
वही सब जो छुपाना चाहिए था
— Meem Maroof Ashraf















