ग़म आँसू शो'ला और दरिया रखना है
एक तरफ़ बाकी सब दुनिया रखना है
गई रातों की नींद मुकम्मल करनी है
अब तेरे बाजू को तकिया रखना है
रिश्ता टूट गया वरना ये तय हुआ था
अपनी बेटी का नाम निया रखना है
बाहर ही नहीं अब तो अपने अंदर भी
रौशनी करनी है , एक दिया रखना है
— Nirvesh Navodayan















