ek jhatke men mere dil ka ye sheesha toota | एक झटके में मेरे दिल का ये शीशा टूटा

  - Nityanand Vajpayee

एक झटके में मेरे दिल का ये शीशा टूटा
तेरी नज़रों में तो सब ठीक ही था क्या टूटा

मैं तड़पता यूँँ रहा रात अँधेरी सारी
जैसे अंबर से कोई दूधिया तारा टूटा

रौशनी बाँट रहा अब भी मैं ख़ुद ही जल के
हौसला आज अँधेरों का है सारा टूटा

लोग बदनाम मुझे करते हों बेशक लेक़िन
छोड़कर मुझको उन्हीं का है सहारा टूटा

मेरी महफ़िल से अदब सीख गए वो होते
पर भटकते हैं वो दर-दर ले कटोरा टूटा

'नित्य' गुस्ताख़ बताते हैं मुझे वो बेशक
नूर उन
में जो चमकता है हमारा टूटा

  - Nityanand Vajpayee

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