एक झटके में मेरे दिल का ये शीशा टूटा
तेरी नज़रों में तो सब ठीक ही था क्या टूटा
मैं तड़पता यूँँ रहा रात अँधेरी सारी
जैसे अंबर से कोई दूधिया तारा टूटा
रौशनी बाँट रहा अब भी मैं ख़ुद ही जल के
हौसला आज अँधेरों का है सारा टूटा
लोग बदनाम मुझे करते हों बेशक लेक़िन
छोड़कर मुझको उन्हीं का है सहारा टूटा
मेरी महफ़िल से अदब सीख गए वो होते
पर भटकते हैं वो दर-दर ले कटोरा टूटा
'नित्य' गुस्ताख़ बताते हैं मुझे वो बेशक
नूर उन
में जो चमकता है हमारा टूटा
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