mere dil men machalta hai vo ik jazbaat hai hi kya | मेरे दिल में मचलता है वो इक जज़्बात है ही क्या

  - Nityanand Vajpayee

मेरे दिल में मचलता है वो इक जज़्बात है ही क्या
सिपहसालार हूँ मैं और मेरी ज़ात है ही क्या

ज़रा सी कामयाबी पर ग़ुरूर उनको है इतना क्यूँ
ये दुनिया ख़्वाब है तो ख़्वाब की औक़ात है ही क्या

महीनों की ग़ज़ब प्यासी ज़मीं का ज़र्रा-ज़र्रा ख़ुश्क
ये कुछ हफ़्तों की नाज़ुक शरबती बरसात है ही क्या

किसी के दिल में जब नफ़रत पनप बैठी मेरे ख़ातिर
तो मेरे एकतरफ़ा प्यार की सौग़ात है ही क्या

उठा रक्खी क़सम उसने मुझे कमतर समझने की
कहूँ मैं लाख बेहतर पर वो मेरी बात है ही क्या

समझते हैं वो अपने आप को इस दर्ज़ा दानिश-मंद
कि उनके सामने यूनान का सुक़रात है ही क्या

  - Nityanand Vajpayee

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