kabhi karunga sanam tujhse ab sawaal nahin | कभी करूँँगा सनम तुझ सेे अब सवाल नहीं

  - Nityanand Vajpayee

कभी करूँँगा सनम तुझ सेे अब सवाल नहीं
रहे भले ही तुझे अब मेरा ख़याल नहीं

उठाए नाज़ तेरे सौ हज़ारों दर्द सहे
हमारे 'इश्क़ सी दुनिया में है मिसाल नहीं

तुम्हें लगा के गले ग़म ही ग़म मिला बेशक़
मगर ये दिल है कि इसको कोई मलाल नहीं

ख़ुदा ने जिसको मसीहा बना के भेजा हो
भला करे न किसी का तो फिर कमाल नहीं

ज़मीन-ए-इश्क़ को ज़रखेज़ जो बना देता
मैं ढूँढ़ता हूँ मिला अब भी वो जमाल नहीं

तू रोज़ रोज़ मुझे छोड़ता पकड़ता क्यूँ
समझ सका मैं तेरी शातिराना चाल नहीं

जो 'नित्य' नैनों के गहरे भँवर से बच निकला
उसे डुबो दे समंदर की भी मजाल नहीं

  - Nityanand Vajpayee

Tevar Shayari

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