chalo dushmanon ko bhi apne dua den | चलो दुश्मनों को भी अपने दुआ दें

  - Nityanand Vajpayee

चलो दुश्मनों को भी अपने दुआ दें
जो नफ़रत है दिल में उसे अब मिटा दें

बिछाते हैं जो लोग रस्तों में काँटे
हम उनकी डगर में गुलों को बिछा दें

मुहब्बत ही उद्देश्य है ज़िन्दगी का
चलो प्यार से सबको जीना सिखा दें

बहुत है अँधेरा यहाँ नफ़रतों का
ज़रा प्यार का एक दीपक जला दें

भटकती है इंसानियत दर बदर जो
मुक़द्दर का इसको सिकंदर बना दें

जड़े सच-ज़ुबानी पे ताले जो मोटे
उन्हें तोड़ दें सबको सच की शिफ़ा दें

बहुत दहशतों ने किया हमको रुस्वा
तो हिम्मत करें दहशतों को मिटा दें

वो मज़लूम फ़ुटपाथ पर जो सिसकते
उन्हें रोटियाँ और कपड़े दिला दें

हैं जिनकी मुँडेरों पे प्यासे परिंदे
उन्हें चाहिए छत पे पानी रखा दें

हुई मुझ से गुस्ताखियाँ जो अभी तक
मैं ख़ुद माँगता हूँ मेरे रब सज़ा दें

नहीं 'नित्य' को और कुछ चाहिए बस
जो भूखे मिलें उनको भोजन करा दें

  - Nityanand Vajpayee

Ummeed Shayari

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