mashwira hi mashwira maujood hai | मशविरा ही मशविरा मौजूद है

  - Nityanand Vajpayee

मशविरा ही मशविरा मौजूद है
कुछ सही कुछ नारवा मौजूद है

देख लीजे हर तरफ़ तफ़्सील से
क्या नहीं है और क्या मौजूद है

एक आलिम ने बताया है मुझे
हर किसी दिल में ख़ुदा मौजूद है

टूट कर बिखरो कभी गर 'इश्क़ में
शाइरी की यह दवा मौजूद है

ढूँढ़ना चाहो अगर दुनिया में ग़म
बा-ख़ुदा बेइंतिहा मौजूद है

जब तुम्हें सूरत न ख़ुद की भाए तो
मेरे दिल का आईना मौजूद है

'नित्य' फ़ोटो की मुझे अब क्या ग़रज़
दिल में जब वो बेवफ़ा मौजूद है

  - Nityanand Vajpayee

More by Nityanand Vajpayee

As you were reading Shayari by Nityanand Vajpayee

Similar Writers

our suggestion based on Nityanand Vajpayee

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari