fazaa men gul khilaana chahta hooñ | फ़ज़ा में गुल खिलाना चाहता हूँ

  - Nityanand Vajpayee

फ़ज़ा में गुल खिलाना चाहता हूँ
मैं ख़ुद को फिर लुटाना चाहता हूँ

ग़ज़ल तुम पर सुनाना चाहता हूँ
हुनर को आजमाना चाहता हूँ

बनी हो तुम सुहाने रुक्न लेकर
तुम्हें अब गुनगुनाना चाहता हूँ

मेरे दिल के न छेड़ो तार दिलबर
ये नाज़ुक हैं बताना चाहता हूँ

मुझे आग़ोश में अपने छिपा लो
मैं तुम में डूब जाना चाहता हूँ

बहुत दिन से सँभाला दिल ये हमने
तुम्हें इस
में बिठाना चाहता हूँ

ये दुनिया है सितमगर नित्य इस सेे
तुम्हें बिल्कुल चुराना चाहता हूँ

  - Nityanand Vajpayee

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