jo bhi milta thes laga kar jaata hai | जो भी मिलता ठेस लगा कर जाता है

  - Nityanand Vajpayee

जो भी मिलता ठेस लगा कर जाता है
और पुराना घाव हरा कर जाता है

लाखों की महफ़िल में आज अकेला हूँ
हर इक मेरा दर्द बढ़ा कर जाता है

प्रीति पुरानी रंजिश बनती पर तेरा
मुस्काना भारी पलड़ा कर जाता है

क़तरा क़तरा ख़ून सुखाओ मत मेरा
यह मेरी दम को दरिया कर जाता है

बेख़ुद था मैं जिसकी झूठ कथा सुनकर
वो अब मुझको ही झुठला कर जाता है

नित्य नवेला क्षद्म रचाया था तूने
यह मुझको टुकड़ा टुकड़ा कर जाता है

  - Nityanand Vajpayee

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