सब्र कर सब्र की घड़ी है अभी

इतनी मुश्किल से जो मिली है अभी

वक़्त से पहले मौत अच्छी नहीं
ज़िंदगी सामने पड़ी है अभी

आँख रंजूर हो गई मेरी
उस ने जाने की ज़िद गढ़ी है अभी

बा'द तेरे कोई नहीं होगा
तू मिरी आख़िरी ख़ुशी है अभी

तू भी 'परवेज़' को समझ न सका
तंज़ तेरा भी लाज़मी है अभी

— Parvez Shaikh

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