कुछ भी अच्छा नहीं हुआ मिरे साथ
जब से तू ने किया गिला मिरे साथ
सोचता था कि वो मिरा हैं फ़क़त
जिस ने अच्छा नहीं किया मिरे साथ
उस को मालूम था ग़रीब हूँ मैं
इश्क़ का ढोंग क्यूँ रचा मिरे साथ
तुम पर अब प्यार आ रहा है मुझे
कुछ तो कर दीजिए बुरा मिरे साथ
सब ने परवेज़ से नज़र फेरी
वो अकेला था जो हँसा मिरे साथ
— Parvez Shaikh















