वही लड़की जो गोरी थी वही काली निकलती है
अगर साज़िश के पीछे आपकी वाली निकलती है
कभी ससुराल जाकर के मनाकर देखिए होली
कभी सरहज निकलती है कभी साली निकलती है
मुहल्ले की सभी भउजाइयों का रंग देवर पर
उतरता है तो बरबस होंट से गाली निकलती है
करें क्या हम कहो जानांँ कहीं टिकुली कहीं पायल
कहीं तकिए के नीचे कान की बाली निकलती है
जहाँँ सब लोग पागल हैं करें सब क़ैद मुट्ठी में
सभी की अंत में मुट्ठी वहीं ख़ाली निकलती है
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