har ek saans hi ham par haraam ho gaii hai | हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है

  - Rajesh Reddy

हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है
ये ज़िंदगी तो कोई इंतिक़ाम हो गई है

जब आई मौत तो राहत की साँस ली हम ने
कि साँस लेने की ज़हमत तमाम हो गई है

किसी से गुफ़्तुगू करने को जी नहीं करता
मेरी ख़मोशी ही मेरा कलाम हो गई है

परिंदे होते तो डाली पे लौट भी जाते
हमें न याद दिलाओ कि शाम हो गई है

इधर तो रोज़ के मरने से ही नहीं फ़ुर्सत
उधर वो ज़िंदगी फ़ुर्सत का काम हो गई है

हज़ारों आँसुओं के बाद इक ज़रा सी हँसी
किसी ग़रीब की मेहनत का दाम हो गई है

बना न पाई कभी आदतों को अपना ग़ुलाम
ये ज़िंदगी तो ख़ुद उन की ग़ुलाम हो गई है

पुरानी यादों ने जब भी लगा लिया फेरा
इस उजड़े दिल में बड़ी धूम-धाम हो गई है

  - Rajesh Reddy

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