hamaare bin tumhaare dil kii haalat kaun samjhega | हमारे बिन तुम्हारे दिल की हालत कौन समझेगा

  - Rakesh Mahadiuree

हमारे बिन तुम्हारे दिल की हालत कौन समझेगा
जहाँ तक हम समझ लेंगे ये वहशत कौन समझेगा

बिताई उम्र है मैं ने किसी ज़ालिम की चाहत में
अगर हम ही नहीं समझे मुहब्बत कौन समझेगा

कभी धीरे से आ बैठो किसी के मन के मन्दिर में
यूँँ ही चढ़कर पुकारोगे तो शिद्दत कौन समझेगा

तुम्हारे हाथ में इक दिन किसी का हाथ था जानी
तुम्हीं गर अब न समझोगे तो राहत कौन समझेगा

सर-ए-महफ़िल यूँँ उठकर के हमारे पास मत आओ
तुम्हारे बिन तुम्हारे दिल की हालत कौन समझेगा

हमारी लाश को यारों ज़मी में दफ़्न मत करना
हमेशा महके ही तुर्बत तो तुर्बत कौन समझेगा

  - Rakesh Mahadiuree

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