आदमी के हाथ में शमशीर है जानी
फूल के सीने में कोई तीर है जानी
जिन मुसव्विर ने कभी ये चित्र खींचा था
आज उनके हाथों में ज़ंजीर है जानी
ज़िंदगी से ख़ुश हूँ मैं तो तुमको क्या हैरत
ये हमारे ख़्वाब की ता'बीर है जानी
तुम जिसे अपना बताते फिर रहे हो दोस्त
वो हमारे नाम की जागीर है जानी
एक अर्सा मैं ने इसको दिल में रक्खा है
ये जो तेरे पर्स में तस्वीर है जानी
मैं उसे खोकर तो इक पल जी नहीं सकता
वो फ़क़त लड़की नहीं तक़दीर है जानी
Read Full