'आशिक़ की मुहब्बत का असर देख रहे हैं
दीवानगी के हाथ में सर देख रहे हैं
हम फूल में काँटों का हुनर देख रहे हैं
क़ुदरत के करिश्में का असर देख रहे हैं
तुम देख रहे हो यही टूटे हुए कुछ पर
हम मौत की आँखों में भी डर देख रहे हैं
मैं गाँव से लाया था इन्हें चाँद दिखाने
ये सारे के सारे ही नगर देख रहे हैं
सब कर रहे हैं शाह तेरे मौत पे मातम
हम मारने वाले का जिगर देख रहे हैं
तुम देख रहे हो किसी बदले की नज़र से
हम टूटते चिड़ियों के भी पर देख रहे हैं
दीवाने ने ऐलान बग़ावत का किया है
और ज़िल्ल-ए-इलाही जी ख़बर देख रहे हैं
तुम देख रहे हो किसी आकाश पे ख़ुद को
हम बाप के साए का असर देख रहे हैं
महबूब ने मिलने को क़यामत में कहा है
सो हम भी खड़े राह-गुज़र देख रहे हैं
'राकेश' तेरे हाथों में हालात की ज़ंजीर
देखी नहीं जाती है मगर देख रहे हैं
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