ungaliyaan fer raha tha vo khayaalon men kahiin | उँगलियाँ फेर रहा था वो ख़यालों में कहीं

  - Rehana Qamar

उँगलियाँ फेर रहा था वो ख़यालों में कहीं
लम्स महसूस हुआ है मेरे बालों में कहीं

अब मेरा साथ नहीं देता पियादा दिल का
हार जाऊँ न मैं आ कर तेरी चालों में कहीं

इस तशख़्ख़ुस पे भी रहता है ये धड़का दिल को
खो न जाऊँ मैं तेरे चाहने वालों में कहीं

एक सूरज ने मुझे चाँद का रुत्बा बख़्शा
वर्ना होती मैं किताबों के हवालों में कहीं

मुझ को लगता तो नहीं वो मुतज़लज़ल लेकिन
उस को वहशत ही न ले जाएँ ग़ज़ालों में कहीं

  - Rehana Qamar

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