Rehana Qamar

Rehana Qamar

@rehana-qamar

Rehana Qamar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rehana Qamar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मुझ को डोली में बिठा डर के हवाले कर दे मेरी माँ मुझ को मुक़द्दर के हवाले कर दे — Rehana Qamar
नहीं है घर में तेरी याद के अलावा कुछ तो किस के सामने चाय बना के रखती हूँ — Rehana Qamar
जो मुझ से इश्क़ के क़िस्से सुनाता फिरता था कहीं वो मिलता तो मैं उस को आइना देती — Rehana Qamar
जो कहना चाहती हूँ वो तो कह नहीं पाती ज़बाँ पे तज़्किरे आब-ओ-हवा के रखती हूँ — Rehana Qamar
उस से बिछड़ के ख़ुद को सँभाला नहीं गया लगता है गिर पड़ी हूँ किसी चलती रेल से — Rehana Qamar

Ghazal

मैं जब भी याद की शमएँ जला के रखती हूँ ये मेरी ज़िद है कि आगे हवा के रखती हूँ मैं टूट सकती हूँ लेकिन मैं झुक नहीं सकती शिकस्त-ए-ज़ात में पहलू अना के रखती हूँ वो बादबाँ है अगर कश्ती-ए-मोहब्बत का मैं बादबान से रिश्ते हवा के रखती हूँ नहीं है घर में तेरी याद के अलावा कुछ तो किस के सामने चाय बना के रखती हूँ तुम्हारे ख़त हैं महकते गुलाब के मानिंद वो और खुलते हैं जितना छुपा के रखती हूँ जो कहना चाहती हूँ वो तो कह नहीं पाती ज़बाँ पे तज़्किरे आब-ओ-हवा के रखती हूँ मैं जानती हूँ कि आना नहीं किसी ने 'क़मर' मगर मुंडेर पे शमएँ जला के रखती हूँ — Rehana Qamar
अज़िय्यतों से निकलने का मशवरा देती मैं उस की थी तो नहीं फिर भी हौसला देती किसी अज़ाब से कम तो नहीं है ख़ुश रहना दुआ के नाम पे क्यूँँ उस को बद-दुआ' देती छुपा भी लेती मेरे भेद को अगर बिल-फ़र्ज़ हवा का क्या है कोई और गुल खिला देती बजा कि सहल न था उस का हम-सफ़र होना कम-अज़-कम उस को पलटने का रास्ता देती जो मुझ से इश्क़ के क़िस्से सुनाता फिरता था कहीं वो मिलता तो मैं उस को आइना देती मेरे ख़ुदा कोई मसरफ़ तो होता अश्कों का फ़सील-ए-शहर की तहरीर ही मिटा देती ख़ुदा गवाह कि सर से झटक के देख लिया नहीं था बस में वगर्ना उसे भुला देती मैं उस की ख़ास इनायत से बच गई हूँ 'क़मर' वगर्ना ख़ल्क़-ए-ख़ुदा तो मुझे मिटा देती — Rehana Qamar